tag:blogger.com,1999:blog-3508764133181349364.post5692002575149820846..comments2007-12-03T23:57:06.046-08:00Comments on सुनहरे सपने: मैं तो राष्ट्रपति भवन की सिढियाँ जरूर चढ जाउँगी।नीरज शर्माhttp://www.blogger.com/profile/02856956576255042363noreply@blogger.comBlogger4125tag:blogger.com,1999:blog-3508764133181349364.post-62763444529178622552007-12-03T23:57:00.000-08:002007-12-03T23:57:00.000-08:00सुनिताजी, अजय जी, जाकिरभाई । बहुत-बहुत धन्‍यवाद। उ...सुनिताजी, अजय जी, जाकिरभाई । बहुत-बहुत धन्‍यवाद। उत्‍साहवर्धन के लिये। मेरा मानना है कि आपके मन में व्‍यवस्‍था के प्रति कोई पीडा है या आप एवं बहुसंख्‍य उससे सहमत नहीं है तो आपको उसे देश व समाज हित में सुधारने के लिये प्रयास अवश्‍य करना चाहिये और इन प्रयासों के लिये आप अपनी कलम को हथियार बना कर भी आगे बढ सकते हैं। जाकिर भाई आपने जो आकलन किया है इस लेख का, पता नहीं मैं इस योग्‍य हूँ या नहीं पर किसी भी लेखक को अपनी रचना की आलोचना व समीक्षा के हमेशा तैयार रहना चाहिये। जितना वह प्रशंसा की आकांक्षा रखता है उतनी ही उसे समीक्षात्‍मक, सकारात्‍मक आलोचना के लिये भी तैयार रहना चाहिये। और मैं आप सभी से भी निवेदन करता हूँ कि आपको कहीं मेरी लेखनी में त्रुटि नजर आये या कोई कमी नजर आये तो मुझे अपना समझ कर आगाह जरूर करें। मैं इस कथन का पूर्ण हिमायती हूँ कि "हो सकता है मैं आपके विचारों से सहमत ना हो पाऊं, फिर भी विचार प्रकट करने के आपके अधिकारों की रक्षा करूंगा" -- वाल्‍तेयरनीरज शर्माhttp://www.blogger.com/profile/02856956576255042363noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-3508764133181349364.post-75373460206608803342007-11-24T21:39:00.000-08:002007-11-24T21:39:00.000-08:00व्यंग्य लिखना एक कठिन विधा है। आपने उसमें कमाल हास...व्यंग्य लिखना एक कठिन विधा है। आपने उसमें कमाल हासिल किया हुआ है। मैं आपकी इस पैनी लेखनी को सलाम करता हूं।ज़ाकिर अली ‘रजनीश’http://www.blogger.com/profile/03629318327237916782noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-3508764133181349364.post-74066243550518695152007-07-20T04:42:00.000-07:002007-07-20T04:42:00.000-07:00बहुत खूब, नीरज जी! आप के व्यंग्य की धार खासी पैनी ...बहुत खूब, नीरज जी! आप के व्यंग्य की धार खासी पैनी है. पर इससे मोटी चमड़ी वाले राजनीतिज्ञों को शायद ही कोई फर्क पड़े. फिर भी लगे रहें- कर्मण्येवाधिकारस्ते.अजय यादवhttp://www.blogger.com/profile/12784365227441414723noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-3508764133181349364.post-27152960116393473472007-07-17T21:02:00.000-07:002007-07-17T21:02:00.000-07:00नीरज जी अच्छा कटाक्ष किया है भई...वैसे वो बनना चाह...नीरज जी अच्छा कटाक्ष किया है भई...वैसे वो बनना चाहती है तो बनने भी दो ना...सीढ़ीयाँ अगर चढ़ना चाहती है तो चढ़ने भी दो...क्या फ़र्क पड़ता है राष्ट्रपति कोई भी बने...काम तो वही करना है जो सभी करते आये है...<BR/><BR/><BR/>सुनीता(शानू)shanoohttp://www.blogger.com/profile/16942415346080460227noreply@blogger.com